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ज्यादातर चिकित्सा विज्ञानियों और मनौविज्ञानियों की रिसर्च का सार यह है कि ज्यादातर नशा करने वालों में नशा करते रहनें से कैमिकल रिएक्शन के फलस्वरूप उनके शरीर और मन में कुछ ऐसे स्थाई बदलाव हो जाते हैं जिन्हें पूरी तरह रोग मुक्त करना सम्भव नहीं है । यहाँ हम सिर्फ एक पक्ष के बारे में विचार करें कि अब जो भी यथास्थिति अवस्था है उसमें कुछ हार्मोंस रिलीज नहीं हो रहे उनका Secretion (स्त्राव) नहीं हो रहा, कुछ न्यूरॉन्स समुचित ढंग से काम नहीं कर रहे फलस्वरूप इसी नशैलेपन में यह भी शामिल है कि उपरोक्त कारण से अधिकाँशत: नशैलची बहुधा अचानक बुरा बुरा सा अनुभव करना(Bad feeling) का शिकार होते हैं*और जाकर शराब पीते हैं। इसलिए एक नशैलची का अनुशासित जीवन जीना और अपनें आपको खुश एवँ तनाव रहित रखना उसकी स्वयं की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। एक नजर हम देखें कि : —
शरीर में बहुत से हार्मोंस होते हैं जो अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं। वैसे ही खुश रहने के लिए चार प्रकार के हार्मोंस होते हैं जिनके बढ़ने से हम खुश महसूस करते हैं। हमें हमेशा ऐसा लगता है कि हमारी खुशी या दुख के लिए दूसरे जिम्मेदार होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। हमारे शरीर में पाए जाने वाले हार्मोंस हमारी खुशियों के लिए जिम्मेदार होते हैं। इनके बढ़ने या कम होने से हमारी खुशियां भी प्रभावित होती है। आइए जानते हैं उन हार्मोंस के बारे जिनसे हमारी खुशियां जुड़ी हुई होती हैं।

1- एंडोर्फिन:

एंडोर्फिन ऑपियोड न्यूरोपैप्डाइड हैं, जो नर्वस सिस्टम के द्वारा उत्पादित होता है। ये हमारे शरीर में होने वाले दर्द से लड़ने में मदद करता है इसलिए इसे पेन किलर हार्मोंस के नाम से भी जाना जाता है जो सुकून का अनुभव कराता है। इसकी कमी के कारण हमें हल्का सिरदर्द महसूस होता है और कभी-कभी बहुत चक्कर आता है। तो ऐसे में एंडोर्फिन को प्रेरित करने का सबसे अच्छा तरीका एक्सरसाइज होता है।
एरोबिक और एनारोबिक एक्सरसाइज दोनों हमारे एंडोर्फिन को प्रभावित करने में मदद करता है। 10 दिनों के लिए 30 मिनट तक ट्रेडमिल पर चलने से डिप्रेशन की समस्या कम हो सकती है।

2-सेरोटोनिन: –

हैपी हार्मोंस यानि सेरोटोनिन सबसे अच्छा हार्मोंस होता है जो खुशियों के लिए जिम्मेदार होता है क्योंकि यह एक एंटीडिप्रेसेंट की तरह काम करता है। सेरोटोनिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो उन चीजों को ट्रिगर करता है जिसे हम हर दिन करते हैं।
शरीर पर पड़ने वाली धूप की तेज किरण सेरोटोनिन को बढ़ाने में मदद करता है। एक्सरसाइज और हैप्पी थॉट्स इस हार्मोंस के उत्पादन को प्रोत्साहित करता है। अपने आहार में ट्रिप्टोफैन-हैवी फूड्स का अधिक सेवन करना भी आपके इस हार्मोंस को रिलीज करता है।

3- डोपामिन:

डोपामिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जिसे “केमिकल ऑफ रिवॉर्ड” भी कहा जाता है। जब आप कोई लक्ष्य बनाते हैं और उस लक्ष्य तक पहुंच जाते हैं या वह कार्य पूरा कर लेते हैं, यह विचार मन में आते ही चलो कार्य पूर्ण हो गया तो आपको अपने मस्तिष्क में डोपामाइन की एक सुखद हिट प्राप्त होती है जो आपको बताता है कि आपने एक अच्छा काम किया है। डोपामिन के बढ़ाने से अन्य स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। इसलिए एक्शन इज द मैजिक वर्ड।

4- ऑक्सीटोसिन:

ऑक्सीटोसिन को लव हार्मोन के नाम से भी जाना जाता है। ऑक्सीटोसिन प्यार और विश्वास की भावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ खुशियों को बढ़ाने में भी मदद करता है। महिलाएं ऑक्सीटोसिन से परिचित होती हैं क्योंकि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान यह हार्मोन रिलीज होता है। ऑक्सीटोसिन को बढ़ावा देने के लिए मसल्स को रिलैक्स करने की जरूरत होती है ।
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